
चंडीगढ़। भारत और ब्रिटेन के बीच हुए व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते को हरियाणा सरकार ने राज्य के उद्योगों, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों और निर्यातकों के लिए बड़ा अवसर बताया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को आयोजित ‘हरियाणा-ब्रिटेन व्यापार सेतु’ कार्यक्रम में कहा कि इस समझौते से प्रदेश के कपड़ा, जूता, रत्न एवं आभूषण और अभियांत्रिकी उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में बेहतर पहुंच मिलने की संभावना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा ने अपनी अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजार से जोड़ने का दूरदर्शी लक्ष्य अपनाया है। भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता इस दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव है। इसके माध्यम से प्रदेश के उद्योगों को निर्यात बढ़ाने, नई व्यावसायिक साझेदारी विकसित करने और ब्रिटिश बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिलेगा।
भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता 15 जुलाई 2026 से प्रभावी बताया गया है। इसके अंतर्गत भारतीय उत्पादों के लिए ब्रिटेन में शुल्क संबंधी रियायतों और बेहतर बाजार पहुंच का प्रावधान है। हालांकि, किसी उत्पाद पर मिलने वाली वास्तविक रियायत उसके टैरिफ वर्गीकरण, मूल देश के नियम और समझौते की अन्य शर्तों पर निर्भर करेगी।
कपड़ा और परिधान उद्योग को नई उम्मीद
हरियाणा का गुरुग्राम, पानीपत और फरीदाबाद क्षेत्र कपड़ा, रेडीमेड परिधान, होम फर्निशिंग तथा अन्य टेक्सटाइल उत्पादों के लिए जाना जाता है। ब्रिटेन के बाजार में शुल्क संबंधी लाभ मिलने से राज्य के निर्यातकों को दूसरे देशों के उत्पादों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बनने में मदद मिल सकती है।
पानीपत के कालीन, कंबल, बेडशीट, होम टेक्सटाइल और पुनर्चक्रित धागे से तैयार उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहले से मांग है। व्यापार समझौते के बाद स्थानीय उद्यमी ब्रिटेन में नए खरीदारों और खुदरा कंपनियों से सीधा संपर्क स्थापित कर सकते हैं। इससे उत्पादन बढ़ने के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों से कहा कि शुल्क में रियायत को केवल व्यापारिक लाभ के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। निर्यात बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों, समय पर आपूर्ति, पर्यावरण अनुकूल उत्पादन और उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग पर भी ध्यान देना होगा।
जूता और चमड़ा क्षेत्र को बेहतर बाजार
राज्य में जूता और चमड़े के उत्पाद तैयार करने वाली कई छोटी और मध्यम इकाइयां संचालित हैं। ब्रिटेन उच्च गुणवत्ता वाले फुटवियर का बड़ा उपभोक्ता बाजार माना जाता है। व्यापार समझौते से हरियाणा के निर्माताओं को वहां अपने उत्पाद पहुंचाने की नई संभावनाएं मिल सकती हैं।
इस अवसर का लाभ उठाने के लिए इकाइयों को डिजाइन, गुणवत्ता और टिकाऊ उत्पादन से जुड़े मानकों को अपनाना होगा। ब्रिटिश बाजार में पर्यावरण और श्रम मानकों को विशेष महत्व दिया जाता है। ऐसे में निर्माताओं को कच्चे माल की आपूर्ति से लेकर उत्पादन प्रक्रिया तक आवश्यक प्रमाणन और दस्तावेज तैयार रखने होंगे।
छोटे उद्यमों के सामने अंतरराष्ट्रीय बाजार की जानकारी, प्रमाणन की लागत और खरीदार तलाशने जैसी चुनौतियां रहती हैं। ‘व्यापार सेतु’ जैसे कार्यक्रम निर्यातकों, सरकारी एजेंसियों और विदेशी खरीदारों के बीच संवाद स्थापित करने में सहायक हो सकते हैं।
अभियांत्रिकी और ऑटो उद्योग के लिए अवसर
गुरुग्राम, फरीदाबाद, मानेसर और आसपास का औद्योगिक क्षेत्र ऑटोमोबाइल, ऑटो कलपुर्जे, मशीनरी और अभियांत्रिकी उत्पादों का प्रमुख केंद्र है। भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते से इन क्षेत्रों को भी निर्यात बढ़ाने का अवसर मिलने की उम्मीद है।
हरियाणा की औद्योगिक इकाइयां पहले से कई वैश्विक कंपनियों की आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा हैं। बेहतर बाजार पहुंच मिलने पर वे ब्रिटिश कंपनियों के साथ तकनीकी सहयोग, संयुक्त उत्पादन और दीर्घकालीन आपूर्ति समझौते कर सकती हैं। इलेक्ट्रिक वाहन, उन्नत मशीनरी और हरित तकनीक जैसे नए क्षेत्रों में भी सहयोग की गुंजाइश बन सकती है।
इसका लाभ केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। ऑटोमोबाइल और अभियांत्रिकी क्षेत्र से जुड़ी छोटी इकाइयां भी अप्रत्यक्ष रूप से निर्यात आपूर्ति शृंखला का हिस्सा बन सकती हैं। इसके लिए उन्हें गुणवत्ता प्रमाणन, आधुनिक मशीनों और कुशल मानव संसाधन में निवेश करना होगा।
रत्न एवं आभूषण कारोबार को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने रत्न एवं आभूषण क्षेत्र को भी समझौते से लाभ मिलने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया। ब्रिटेन में भारतीय आभूषणों और पारंपरिक डिजाइन की मांग है। शुल्क संबंधी बाधाएं कम होने से इस कारोबार से जुड़े उद्यमियों को नए खरीदारों तक पहुंचने का अवसर मिल सकता है।
रत्न एवं आभूषण के निर्यात में उत्पाद की प्रामाणिकता, हॉलमार्किंग और स्रोत संबंधी दस्तावेज महत्वपूर्ण होते हैं। व्यापार समझौते का लाभ लेने के लिए कारोबारियों को इन नियमों का पालन करना होगा। डिजिटल कारोबार और ऑनलाइन बिक्री मंच भी छोटे कारोबारियों को ब्रिटिश ग्राहकों तक पहुंचने का माध्यम बन सकते हैं।
कौशल और सेवा क्षेत्र को भी फायदा
हरियाणा का गुरुग्राम सूचना प्रौद्योगिकी, कॉरपोरेट सेवाओं, डेटा विश्लेषण और वित्तीय सेवाओं का बड़ा केंद्र है। भारत-ब्रिटेन आर्थिक साझेदारी से वस्तुओं के साथ सेवा क्षेत्र में भी अवसर बढ़ सकते हैं। ब्रिटिश कंपनियों के साथ आईटी, अनुसंधान, डिजाइन और परामर्श सेवाओं में साझेदारी से कुशल युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं बन सकती हैं।
नई संभावनाओं का लाभ लेने के लिए उद्योगों की जरूरत के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षण देना जरूरी होगा। तकनीकी कौशल, अंग्रेजी संचार, डिजिटल व्यापार और अंतरराष्ट्रीय नियमों की जानकारी राज्य के युवाओं तथा उद्यमियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर सकती है।
निर्यातकों को सहयोग का भरोसा
मुख्यमंत्री ने राज्य के उद्योगपतियों और निर्यातकों को सरकार की ओर से आवश्यक सहयोग देने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि हरियाणा को केवल घरेलू विनिर्माण केंद्र नहीं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति शृंखला का मजबूत भाग बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
व्यापार समझौते का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब उद्योगों को नियमों, प्रमाणन, लॉजिस्टिक्स और ब्रिटेन के बाजार की मांग की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए राज्य सरकार, निर्यात संवर्धन संस्थाओं और उद्योग संगठनों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होगा।
भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते के तहत करीब 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात को शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने की बात विभिन्न रिपोर्टों में कही गई है, लेकिन हर निर्यातक को उत्पादवार अनुसूची और मूल देश के नियमों की जांच करनी होगी।





